वोह थी ...
चांदनी सी,
फूलों की लड़ी सी,
बारिश की झड़ी सी,
वोह थी ...
वोह थी ...
गुनगुनी धूप सी,
अल्हड़ रूपसी,
वोह थी ...
वोह थी ...
बहती धारा,
साहिल का किनारा,
इन्द्रधनुष न्यारा,
वोह थी ...
चली गई वोह मुझे छोड़,
टूट गई उसके जीवन की डोर,
पीछे रह गया मैं अकेला,
और मेरे आसुओं का रेला,
और रह गया एक मीठा मौन,
वोह थी ... ... ...
Monday, July 21, 2008
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