Tuesday, September 3, 2013

आजकल..

मित्रों ये वार्तालाप रात्रि १.०० बजे के लगभग प्रिय मित्र Raju Yadav (राजू यादव जी) के साथ हुआ..

मज़ाक मज़ाक में बहुत कुछ कह दिया गया.. गौर फरमायें..
एक वाक्य मेरा और एक उनका.. थोड़े ऊपर-नीचे करके पेश हैं..

आजकल की शिक्षा कुछ कहने लायक कहाँ बची है..
यह चंद मफियाओ के घर सजी है..
पता नहीं विधाता ने देश के नौनिहालों की किस्मत कैसी रची है..??
बच्चों के विकास के नाम पर मिड डे मील की रसोई सजी है..
अब रसोइया बनके शिक्षकों की कौन सी इज्जत बची हैं..
हर कोई सरकारी शिक्षक बनें इसी के लिए हाय तौबा मची हैं।
बाबा गये जेल कुकर्मी.. पर चेलों की अब भी तनी है..
सोते हैं पहरेदार जहाँ.. वहाँ चोरों की महफ़िल सजी है..
बाबा गये जेल कुकुर्मी.. लेकिन उनके चेलों की देखो बेशर्मी..
पिट गयें उनसें पुलिस और मीडियाकर्मी..
बीजेपी कहती हमारी हैं पूरी इन पर हमदर्दी..
घुट-घुट कर जीना सीख लिया हमने..
बस सिर्फ़ घिसटती ज़िंदगी बची है..

दी एंड..
— with Raju Yadav and Sandeep Sharma.
गुरु-गोविंद दोऊ खड़े.. काके लागूँ पायं..??

गुरु तो "गुरु-घंटाल" निकल गये..

अब गोविंद तू ही बता..

किसपे विश्वास किया जाए..??
मुझे खुद पे इतना है यकीं..
क़ि मैं लड़ सकूँ..
क़ि मैं लड़ सकूँ..
चाहे हो ज़माना भी खिलाफ..
लूँगा हर जख्म का हिसाब..
मेरा ज़मीर कुचल दिया तुमने..
मेरा ईमान भी बेचा..
शिकायत न सुनी एक मेरी..
चिल्लाता रहा मैं बेज़ा..
आने दो चुनाव..
दूँगा तुम्हे वही मैं घाव..
आने दो चुनाव..
आने दो चुनाव..
चारों तरफ फैला है तम..
बने रक्षकम ही भक्षकम..
बढ़े अबलाओं पे सितम..
पता नही कब जागेंगे हम..??
कब बनेंगे नये कायदे नियम..??
उठो.. जागो..
तोड़ दो ये  सड़ा-गला.. भोथरा सिस्टम..
एक "आसा" हुई ख़तम..
बाकी को उठा ले यम..
जय हो.. बम बम..
उठ गया मित्रों..
नींद नहीं आई.. ऐसी खबर देखी क़ि रहा न गया..

पेशे-नज़र..एक खबर.. थोड़ी इधर और थोड़ी उधर..


पीएम ने बीजेपी लीडरों.. आडवाणी जी, सुषमा स्वराज व अरुण जेटली को मिलने बुलाया..
बुलाया था संसद चलने में गतिरोध दूर करने की बात करने.. जिससे लटके हुए "बिल" पास हो सकें..

अरे पीएम कहते यार..
संसद चलने दो..
इस गोरमिंट को थोडा और..
देश को छलने दो..

करवा दो लटके बिल पास..
मेरे संतरी-मंतरी हैं उदास..
सब लगाए हैं आस..
संसद चलने दो..

हमेशा मैडम की चलती है..
अभी तो वो हैं गईं इंडिया से बाहर..
क्योंकि वो गुप्त हैं बीमार..
थोड़ी मेरी भी तो चलने दो..
थोड़ी मेरी भी तो चलने दो..
संसद चलने दो..

बिल जब हो जाएँगे पास..
नये भष्ट अवसर पैदा होंगे हज़ार..
लगने दो घोटालों का अंबार..
संसद चलने दो..

अरे पीएम कहते यार..
संसद चलने दो..

जय हो.. बम बम..