Monday, August 18, 2008

नवोदय है नव-उदय,
इक अंत ढलते सूरज का,
इक मद्ध्हम चमकते तारे का।
इक गुमनाम सरस्वती का,
फूलों की कोमल कलियों का,
पतझर में सूखती डालियों का।
गावों की मिट्टी के हीरों का।
देश के लिए मिट जाएँ ;
उन अमर शहीदों का।
पैदा होतें हैं भागीरथ है यहाँ,
देश में क्रांति लाने को।
इस घर-आँगन का पत्ता-पत्ता,
आज भी आवाज़ ये हमको देता है।
जग में सबसे सुंदर हिंदुस्तान हमारा है।
जान भी अगर देनी पड़े,
आंच न इसपे आने देना है

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